कोई रंग अब जमता नहीं कोई रंग अब जमता नहीं
मुरलिया की धुन जबसे कानों पड़ी है बँधी डोर से हम खिंचे जा रहे थे। मुरलिया की धुन जबसे कानों पड़ी है बँधी डोर से हम खिंचे जा रहे थे।
फासलों के इस स्याह से जंगल में नजदीकियों के कुछ जुगनू ढूंढते हैं फासलों के इस स्याह से जंगल में नजदीकियों के कुछ जुगनू ढूंढते हैं
रूह को संभालना था तुझे, पर सूरत सँवारने पर तेरा जोर है, रूह को संभालना था तुझे, पर सूरत सँवारने पर तेरा जोर है,
कौन सुनेगा ? किसे सुनाएँ ? अपनी ढपली, अपना राग। कौन सुनेगा ? किसे सुनाएँ ? अपनी ढपली, अपना राग।
कर दोगे इच्छा पूरी तो, गाऊंगा ताउम्र प्रभु आपका गुणगान। कर दोगे इच्छा पूरी तो, गाऊंगा ताउम्र प्रभु आपका गुणगान।